अखंड प्रताप सिंह की रिपोर्ट केसरिया हिंदुस्तान
शहडोल। जिले के अमलाई स्थित ओरिएंट पेपर मिल में एक स्थायी श्रमिक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। मिल परिसर के शौचालय में कर्मचारी राजेश तिवारी का शव फांसी के फंदे से झूलता मिला। सूचना मिलते ही अमलाई पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। हालांकि, इस घटना को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। क्या यह आत्महत्या थी, या इसके पीछे कोई और साजिश छिपी हुई है?
घटना का पूरा विवरण
जानकारी के अनुसार, मृतक राजेश तिवारी ओरिएंट पेपर मिल में स्थायी कर्मचारी थे। घटना मंगलवार दोपहर की बताई जा रही है, जब अचानक यह खबर फैली कि प्लांट के अंदर स्थित शौचालय में एक श्रमिक ने आत्महत्या कर ली है। सूचना मिलते ही अमलाई पुलिस मौके पर पहुंची और पुलिस की मौजूदगी में शौचालय का दरवाजा खुलवाया गया। अंदर का नजारा चौंकाने वाला था—राजेश तिवारी का शव फांसी के फंदे से लटका हुआ था, लेकिन उनके पैर जमीन को छू रहे थे।
मिल प्रबंधन ने आत्महत्या की वजह कैंसर बताया
मिल प्रबंधन ने इस घटना को लेकर बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि मृतक राजेश तिवारी लंबे समय से कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे। संभवतः बीमारी से परेशान होकर उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया होगा। लेकिन इसी तर्क पर सवाल उठने लगे हैं—अगर वे कैंसर से इतने अधिक पीड़ित थे कि आत्महत्या जैसा कदम उठाने की नौबत आ गई, तो फिर वे नियमित रूप से ड्यूटी पर कैसे आ रहे थे?
मिल प्रबंधन के मुताबिक, ओरिएंट पेपर मिल अपने कर्मचारियों को मेडिकल बीमा और इलाज की पूरी सुविधा उपलब्ध कराता है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि यदि वे कैंसर से इतने परेशान थे, तो क्या उन्होंने इलाज के विकल्प तलाशे? और यदि वे इतने बीमार थे कि मानसिक रूप से टूट चुके थे, तो उन्हें कंपनी में ड्यूटी करने की अनुमति किसने दी?
फांसी के तरीके ने खड़े किए सवाल
घटना के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों ने इस मौत को लेकर और भी ज्यादा संदेह पैदा कर दिया है। तस्वीरों में दिख रहा है कि मृतक का शरीर फांसी के फंदे में लटका हुआ है, लेकिन उनके घुटने मुड़े हुए हैं और पैर लगभग जमीन को छू रहे हैं। इस तरह की स्थिति आमतौर पर फांसी लगाने के मामलों में नहीं देखी जाती।
इससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या यह वास्तव में आत्महत्या थी, या फिर किसी ने उन्हें फंदे पर लटकाकर आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की?
डॉक्टरी प्रमाण पत्र को लेकर भी उठे सवाल
एक और अहम सवाल यह भी है कि यदि मृतक कैंसर से पीड़ित थे, तो उन्होंने ड्यूटी पर आने के लिए फिटनेस प्रमाण पत्र कैसे प्राप्त किया? आमतौर पर किसी भी गंभीर बीमारी से जूझ रहे कर्मचारी को काम पर जाने की अनुमति नहीं दी जाती, खासकर तब, जब उसे कंपनी की ओर से इलाज की पूरी सुविधा दी जा रही हो।
यह भी गौर करने वाली बात है कि यदि वे इतने बीमार थे कि आत्महत्या जैसा कदम उठाने की स्थिति में पहुंच गए, तो उनके सहकर्मियों, प्रबंधन या परिवार को इस बात की जानकारी क्यों नहीं थी? क्या वे मानसिक तनाव में थे? क्या किसी ने उन पर कोई दबाव डाला था?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट खोलेगी राज
फिलहाल, पुलिस इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही यह साफ हो सकेगा कि राजेश तिवारी की मौत आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई और वजह है। पुलिस मृतक के परिजनों, सहकर्मियों और मिल प्रबंधन से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता चल सके कि क्या कोई बाहरी दबाव या विवाद था, जिसकी वजह से यह घटना घटी।
क्या आत्महत्या या कुछ और ? प्रशासन को देना होगा जवाब
इस घटना ने मिल प्रबंधन और प्रशासन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
1. अगर मृतक कैंसर से पीड़ित थे, तो उन्हें नौकरी पर आने की अनुमति किसने दी?
2. यदि वह ड्यूटी करने लायक थे, तो फिर बीमारी से इतना मानसिक तनाव क्यों?
3. क्या उनकी आत्महत्या के पीछे किसी और तरह का दबाव था?
4. फांसी लगाने के बाद शरीर की मुद्रा सामान्य आत्महत्या के मामलों से अलग क्यों दिख रही है?
फिलहाल, पुलिस इस पूरे मामले को हर एंगल से जांच रही है। सच पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही सामने आ पाएगा। लेकिन इस घटना ने ओरिएंट पेपर मिल के कामकाज और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।