संवाददाता विपिन पटेल तेंदूखेड़ा दैनिक केसरिया हिंदुस्तान
तेंदूखेड़ा-माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल द्वारा घोषित किये गये वार्षिक परीक्षा कार्यक्रम के अनुसार आज 25 फरवरी से परीक्षायें प्रारंभ होने जा रही है। तेंदूखेड़ा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नौ परीक्षा केंद्रों पर हाईस्कूल प्रमाण पत्र परीक्षा में 1319 परीक्षार्थी और हायर सेकंडरी प्रमाण पत्र परीक्षा में 1121 परीक्षार्थी शामिल होंगे। लगभग सभी परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के साथ परीक्षार्थियों को किसी भी प्रकार की कोई असुविधा ना हो को दृष्टिगत रखते हुए व्यापक स्तर पर प्रबंध किए गए हैं।अधिकांश परीक्षा केंद्रों पर बाहर दूसरे गांवों के छात्र भी शामिल होंगे उन्हें आने जाने को लेकर भी समय का ध्यान रखते हुए उक्त परीक्षाएं सुबह 9 बजे 12 बजे तक आयोजित की जायेगी।
कन्या विद्यालय केंद्र में बैठेंगे सर्वाधिक छात्र
तहसील मुख्यालय पर शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तेंदूखेड़ा क्षेत्र का सबसे बड़ा परीक्षा केंद्र है। यहां पर कक्षा दसवीं में 265 तथा बारहवीं में 312 छात्र छात्राएं शामिल होंगे।इस केंद्र में बालक उच्चतर तेंदूखेड़ा के साथ सर्वोदय विद्यालय अंग्रेजी हिन्दी माध्यम के साथ ज्ञानोदय स्कूल के छात्र शामिल होंगे। जबकि बिल्थारी हायर सेकंडरी स्कूल परीक्षा केंद्र में सबसे कम परीक्षार्थी शामिल होंगे।हमारे प्रतिनिधि को मिली जानकारी के अनुसार तेंदूखेड़ा के बालक उच्चतर विद्यालय केंद्र में दसवीं में 161और बारहवीं में 199 छात्र बैठेंगे।देवरी राजमार्ग केंद्र में दसवीं में 260बारहवी में 247 छात्र चांवरपाठा में दसवीं में 108 बारहवीं में 139 छात्र डोभी परीक्षा केंद्र में दसवीं में 201 बारहवीं में 151 छात्र ग्राम बिल्थारी परीक्षा केंद्र में दसवीं में 34 छात्र कक्षा बारहवीं में 35 छात्र छात्राएं शामिल होंगी।इसी भामा हाईस्कूल परीक्षा केंद्र में 113 मदनपुर में 88 और विलगुवां परीक्षा केंद्र में कक्षा दसवीं में 89 तथा बारहवीं में 38 छात्र शामिल होंगे।
सुरक्षा के हो पुख्ता इंतजाम
तेंदूखेड़ा परीक्षा केंद्र में कुछ बाहर ग्रामों के साथ प्राइवेट स्कूलों के परीक्षार्थी शामिल हुआ करते हैं लेकिन विगत वर्षों में जो विषय चर्चाओं में रहें उनकी अब पुनरावृति ना हो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जायें।विगत वर्ष कुछ प्राइवेट स्कूलों के शिक्षक खुले आम इन परीक्षा केंद्रों में घूमकर माहौल गंदा किया करते थे इससे छात्रों में भेदभाव की स्थिति निर्मित होने के साथ इन स्कूलों के छात्र परीक्षा में लगे पंखों खिड़कियां भी तोड़कर जाते थे। जिससे अध्ययन रत छात्र छात्राओं को स्कूली समय में परेशानी हुआ करती थी। और प्रबंधन को भी अलग से व्यय भार पड़ता है।