आशीष शर्मा दैनिक केसरिया हिंदुस्तान
सनावद-मंगलवार हाई कोर्ट खंडपीठ इंदौर न्यायालय नंबर 13 द्वारा विमला कॉन्वेंट हाईयर सेकंडरी विद्यालय के दोनों छात्रों को अहम अंतरिम राहत दी गई है। जिससे अब छात्रा दिव्यांशी नामदेव और गर्व पटेल 27 फरवरी से प्रारंभ होने वाली दसवीं की बोर्ड परीक्षा में बैठ सकेंगे । दरअसल 25 फरवरी 2025 को पीड़ित पालक मोहन नामदेव और सुरेंद्र सिंह पटेल के द्वारा हाई कोर्ट इंदौर मे क्रमांक WP 7305 – 20 याचिका दायर की गई थी। जिसमें माननीय न्यायाधीश सुबोध अभ्यंकर द्वारा याचिका करता को जो विमला कॉन्वेंट स्कूल और मध्य प्रदेश शिक्षा बोर्ड को निर्देशित किया। उस अनुसार याचिका कर्ताओं की ओर से कोई त्रुटि नहीं है और यदि उन्हें बोर्ड परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी गई तो उनका पूरा वर्ष बर्बाद हो जाएगा। अतः मध्य प्रदेश शिक्षा बोर्ड पोर्टल/भौतिक मोड के माध्यम से याचिका कर्ताओं के फॉर्म विमला हाई स्कूल स्कूल को जमा करने की अनुमति दें और दो दिनों के भीतर याचिकाकर्ताओं को प्रवेश पत्र जारी करें, ताकि वे दसवीं बोर्ड परीक्षाओं में उपस्थित हो सके जो 27.02.2025 से शुरू होने वाली हैं। वही अन्य निर्देशों के रहते इस मामले को 24 मार्च. 2025 से शुरू होने वाले सप्ताह में सूचीबद्ध किया जाना भी निर्देशित किया गया है।
जबकि इस मामले में मंगलवार को याचिका करता के अधिवक्ता नितिन सिंह भाटी द्वारा न्यायालय का ध्यान आकर्षित करते हुए बताया गया था, कि 21 फरवरी को जिलाधीश खरगोन द्वारा मध्य प्रदेश शिक्षा मंडल के सचिव को भी याचिकाकर्ताओं को प्रवेश पत्र जारी करने का अनुरोध किया गया है, क्योंकि उनके फॉर्म स्कूल-विमला कॉन्वेंट ह हायर सेकेंडरी स्कूल प्रबंधक सनावद द्वारा जमा नहीं किए जा सके। इस प्रकार, यह याचिका प्रस्तुत की गई है ताकि प्रतिवादियों को निर्देशित किया जा सके वे याचिकाकर्ताओं को अपने फॉर्म जमा करने दें और उनके प्रवेश पत्र तुरंत जारी करें अन्यथा, याचिकाकर्ताओं का एक वर्ष बिना किसी स्पष्ट त्रुटि के बर्बाद हो जाएगा। साथ यह तथ्य भी प्रस्तुत किया गया कि याचिकाकर्ता क्रमांक 1 के पिता पान की दुकान चलाते हैं और याचिकाकर्ता क्रमांक 2 के पिता कृषक हैं, और इस प्रकार, उनसे यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे लगातार छात्रों के प्रवेश की जांच करेंगे।